बिहार का स्वास्थ्य महकमा "भगवान भरोसे": मुख्यमंत्री की नाकामी पर राजद की कड़ी प्रतिक्रिया।
बिहार के राजनीतिक गलियारों में स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर घमासान एक बार फिर तेज हो गया है। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के प्रदेश प्रवक्ता एजाज अहमद ने बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के हालिया बयानों पर तीखा हमला बोला है। आरजेडी ने साफ शब्दों में कहा है कि जब खुद सरकार के मुखिया यह स्वीकार कर रहे हैं कि सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों और सुविधाओं का अकाल है, तो इससे बड़ा प्रमाण और क्या हो सकता है कि बिहार का स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह पटरी से उतर चुका है।
🔍 मुख्य बिंदु और एजाज अहमद के तीखे तेवर
नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के आरोपों पर मुहर: आरजेडी का कहना है कि जो बातें पहले नेता प्रतिपक्ष श्री तेजस्वी प्रसाद यादव ने उठाई थीं, आज खुद मुख्यमंत्री ने उसे सच साबित कर दिया है।
बजट बनाम बदहाली: सरकारी अस्पतालों और डॉक्टरों पर हर साल लगभग 700 करोड़ रुपये खर्च किए जाने के बावजूद जमीन पर मरीजों को न तो डॉक्टर मिलते हैं और न ही बेड जैसी बुनियादी सुविधाएं।
निजी अस्पतालों का खेल: इसके विपरीत, निजी स्वास्थ्य व्यवस्थाओं के लिए खर्च होने वाली राशि में डॉक्टर से लेकर हर इंतजाम चुस्त-दुरुस्त मिलते हैं—यह विडंबना सरकारी तंत्र की कार्यशैली पर बड़ा सवालिया निशान लगाती है।
स्वास्थ्य मंत्री की बर्खास्तगी और माफी की मांग: एजाज अहमद ने मांग की है कि इस बदहाली की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए मुख्यमंत्री को अविलंब स्वास्थ्य मंत्री को पद से हटाना चाहिए और खुद बिहार की जनता से माफी मांगनी चाहिए।
नीति आयोग की रिपोर्ट: आरजेडी ने याद दिलाया कि नीति आयोग की रिपोर्ट के अनुसार भी बिहार का स्वास्थ्य विभाग लगभग हर मोर्चे पर फिसड्डी साबित हुआ है।
जब सूबे के मुखिया ही सरकारी अस्पतालों की लचर व्यवस्था और डॉक्टरों की अनुपलब्धता के आगे बेबस नजर आएं, तो आम जनता को बेहतर इलाज की उम्मीद किससे हो सकती है? यह स्थिति स्पष्ट करती है कि बिहार में स्वास्थ्य सेवाएं भगवान भरोसे चल रही हैं।
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