सुरक्षा का घेरा और डिजिटल खतरे: कुडनकुलम साइबर उल्लंघन से सीख ।
यह भारत के महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे (क्रिटिकल इंफ्रास्ट्रक्चर) की सुरक्षा में मौजूद साइबर जोखिमों पर प्रकाश डालता है। हाल ही में, तमिलनाडु स्थित कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा संयंत्र से जुड़े लगभग 19,000 फाइलों का डेटा लीक डार्क वेब पर सामने आया, जिसमें इंजीनियरिंग ड्रॉइंग, निरीक्षण रिपोर्ट और बीमा दस्तावेज शामिल थे। हालांकि अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि संयंत्र के मुख्य नियंत्रण और सुरक्षा प्रणालियाँ इंटरनेट से अलग (आइसोलेटेड) थीं और सुरक्षित थीं, लेकिन यह घटना सप्लाई चेन की कमजोरियों को उजागर करती है।
डेटा एक थर्ड-पार्टी ठेकेदार (कंट्रेक्टर) के सर्वर पर सुरक्षित था, जो यह दर्शाता है कि जैसे-जैसे परमाणु और अन्य संवेदनशील परियोजनाएं निजी कंपनियों, आपूर्तिकर्ताओं और डेटा सेंटरों तक विस्तृत होती हैं, वैसे-वैसे साइबर हमलों का जोखिम भी बढ़ता जाता है। इस चुनौती से निपटने के लिए मजबूत डेटा वर्गीकरण, शून्य-विश्वास (zero-trust) दृष्टिकोण, सख्त तृतीय-पक्ष अनुपालन प्रमाणपत्र और एक एकीकृत राष्ट्रीय ढांचे की आवश्यकता है।
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