लोकतंत्र की ताकत बनाम प्रशासनिक तंत्र की तानाशाही: पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में राजद प्रत्याशी डॉ. संजीव कुमार की हुंकार।

   


​बिहार की राजनीति इन दिनों एक नए और दिलचस्प मोड़ पर है। पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र का चुनाव केवल एक सामान्य विधान परिषद का चुनाव नहीं रह गया है, बल्कि यह प्रशासनिक तंत्र के कथित दुरुपयोग और लोकतंत्र की ताक़त के बीच एक बड़ा संघर्ष बन चुका है। चुनाव से ठीक पहले जिस तरह का हाई-वोल्टेज ड्रामा देखने को मिला, उसने राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है।

​आधी रात को पुलिस की दस्तक और प्रशासनिक रवैया

​मतदान से ठीक पहले की रात, राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के उम्मीदवार डॉ. संजीव कुमार के आवास पर अचानक भारी पुलिस बल (लगभग सात गाड़ियों में सवार होकर) का पहुंचना कई बड़े सवाल खड़े करता है। आरोप है कि बिना किसी पुख्ता सर्च वारंट के पुलिस ने उनके घर को घेर लिया और अंदर तलाशी लेने की कोशिश की। हालांकि, कड़े विरोध और समर्थकों के जुटने के बाद पुलिस को बैरंग वापस लौटना पड़ा, लेकिन इस घटना ने स्पष्ट कर दिया कि सत्ताधारी खेमा किस हद तक दबाव की राजनीति पर उतर आया है।

​वोटर्स का करारा जवाब और जातिगत समीकरणों का बदला समीकरण

​राजनीतिक जानकारों और एक्सपर्ट्स का मानना है कि प्रशासन के इस दमनकारी रवैये का उल्टा असर देखने को मिला है। स्थानीय मतदाताओं और बुद्धिजीवी शिक्षकों ने इसे लोकतंत्र का अपमान माना। विश्लेषकों का यह भी आकलन है कि इस घटना के बाद भूमिहार समुदाय के एक बड़े वर्ग का झुकाव सहानुभूति और विरोध स्वरूप डॉ. संजीव कुमार की तरफ हुआ है। इसके साथ ही, राजद का पारंपरिक मुस्लिम-यादव (M-Y) समीकरण और महागठबंधन के वाम दलों (Left) का कैडर वोट भी एकजुट होकर मजबूती से डॉ. संजीव के  पाले में जाता दिखाई दे रहा है।

​शुरुआती दौर में ही फर्जी वोटों के खिलाफ रणनीतिक रूप से कदम उठाकर और मतदान केंद्रों पर सतर्कता बरतकर डॉ. संजीव ने अपने प्रतिद्वंद्वियों की चालों को पहले ही कमजोर कर दिया था।

​नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव का कड़ा हमला

​घटना की सूचना मिलते ही नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने तुरंत मोर्चा संभाला। उन्होंने सोशल मीडिया पर वीडियो शेयर करते हुए सरकार और पुलिस प्रशासन पर तीखा हमला बोला। तेजस्वी ने दो टूक कहा कि “लालू प्रसाद यादव और राजद के कार्यकर्ता इन कायरतापूर्ण हरकतों से डरने वाले नहीं हैं। हार के डर से बौखलाई सरकार तंत्र का गलत इस्तेमाल कर रही है।” इसके बाद उन्होंने डॉ. संजीव कुमार के आवास पर जाकर उनका कुशलक्षेम जाना और उन्हें ढांढस बंधाया।

​मीडिया और राजनीतिक विश्लेषकों का पूर्वानुमान

​प्रमुख मीडिया रिपोर्ट्स और राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, इस चुनाव में तमाम प्रशासनिक पहरे और राजनीतिक पैंतरेबाज़ी के बावजूद राजद का पलड़ा भारी नजर आ रहा है। आगामी 27 अक्टूबर को जब चुनाव के परिणाम (Result) सामने आएंगे, तब यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि क्या वाकई जनता ने तानाशाही को हराकर लोकतंत्र की जीत सुनिश्चित की है या नहीं।

बिहार के राजनीतिक घटनाक्रम यह साबित करते हैं कि जब-जब जनता और जनप्रतिनिधियों को दबाने की कोशिश होती है, तब-तब मतदाता और अधिक मुखर होकर अपने मताधिकार का प्रयोग करते हैं।

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