वैश्विक बेरोजगारी का संकट: जनसांख्यिकी लाभांश या गहराता खतरा।
विश्व बैंक के हालिया अनुमान बताते हैं कि वैश्विक अर्थव्यवस्था एक खामोश तबाही के मुहाने पर खड़ी है। ग्लोबल साउथ में युवा आबादी तेजी से बढ़ रही है, लेकिन वैश्विक अर्थव्यवस्था पर्याप्त रोजगार पैदा करने में विफल साबित हो रही है। ऑटोमेशन, रोबोटिक्स और आधुनिक कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के प्रसार ने पारंपरिक विनिर्माण क्षेत्रों की नौकरियों को भारी नुकसान पहुंचाया है, जिससे विकासशील देशों में समय से पहले ही डीइंडस्ट्रियलाइजेशन (औद्योगीकरण का ह्रास) का संकट पैदा हो गया है।
इस चुनौती से निपटने के लिए केवल पारंपरिक नीतियों पर निर्भर रहने के बजाय सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) को बढ़ावा देना, बुनियादी ढांचे का आधुनिकीकरण करना और कृषि व स्वास्थ्य क्षेत्र में रोजगार सृजन पर विशेष ध्यान देना होगा। यदि भारत और अन्य विकासशील देश अपने युवाओं को उचित कौशल और रोजगार अवसर प्रदान करने में असमर्थ रहते हैं, तो उनका जनसांख्यिकी लाभांश एक बड़े जनसांख्यिकीय संकट में बदल सकता है।
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