भूगोल से जुड़े, राजनीति से विभाजित: भारत और बांग्लादेश के संबंधों की वर्तमान दिशा।
यह भारत और बांग्लादेश के बीच के कूटनीतिक, ऐतिहासिक और राजनीतिक संबंधों का विश्लेषण करता है। वर्ष 1971 के मुक्ति संग्राम में भारत की निर्णायक भूमिका के बावजूद, दोनों देशों के राजनीतिक नैरेटिव में समय-समय पर अविश्वास और दूरी देखने को मिली है। जियाुर्रहमान और खालिदा जिया के शासनकाल में बांग्लादेशी राष्ट्रवाद को भारत-विरोधी भावनाओं के साथ जोड़ा गया, जिससे दोनों देशों के संबंधों में जटिलताएं आईं।
बांग्लादेश में राजनीतिक सत्ता परिवर्तन (जैसे शेख हसीना के हटने के बाद) के बावजूद भारत और बांग्लादेश के बीच का भूगोल अपरिवर्तित रहता है। दोनों देशों को आपसी अविश्वास को पीछे छोड़कर क्षेत्रीय सहयोग, व्यापार और द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने के लिए अधिक व्यावहारिक और संयमित दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता है।
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