सटाकर मारने के बाद चुनाव लड़ना, और उसपे राजनीति करना_ बड़ा अहँकार नहीं तो क्या ?-प्रो प्रसिद्ध कुमार।
पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में निवर्तमान MLC डॉ नवल प्रसाद यादव के हालिया बयान ने राजनीतिक हलचल मचा दी है, जहाँ वे अपने विरोधियों को 'सटाकर मारने' की धमकी देते नज़र आ रहे हैं। यह वक्तव्य विरोधियों के प्रति अहँकार और कटुता का स्पष्ट प्रदर्शन है, जो किसी भी जनप्रतिनिधि के लिए अनुचित है।
विरोधी को कम आंकना, अपनी राजनीति को ख़त्म करना_
राजनीतिक जीवन में विरोधियों का होना स्वाभाविक है। वे साधारण नहीं होते, बल्कि जनता द्वारा चुने गए या जनता से जुड़ने वाले होते हैं। डॉ यादव के पांच बार चुनाव लड़ने के कारण, लगभग ५० प्रबल विरोधी सीधे उनकी इस बात से आहत होंगे। यदि प्रत्येक विरोधी के १०-१० समर्थक भी मानें, तो लगभग ५०० विरोधी उनके अहँकार के परिणामस्वरूप सीधे तौर पर उनसे जुड़ जाएंगे, जो उनके चुनावी भविष्य के लिए घातक सिद्ध हो सकता है।
लालू यादव का अपमान, अपनी कब्र खोदने जैसा_
अपने बयानों में लालू यादव की हैसियत को कमतर बताना भी उनके राजनीतिक आत्महत्या करने जैसा कदम है। लालू यादव एक लोकप्रिय नेता हैं, जिनके समर्थक न केवल बिहार बल्कि पूरे देश में फैले हैं। उनके चाहने वालों की भावना को आहत करना डॉ यादव के लिए महंगा पड़ सकता है।
पटना के पटलीपुत्रा के तत्कालीन रजिस्ट्रार से अभद्रता, विद्वानों का अपमान_
डॉ यादव द्वारा पटना के पाटलीपुत्रा यूनिवर्सिटी के तत्कालीन रजिस्ट्रार डॉ एन के झा को मंच पर डांटना और अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करना भी निंदनीय है। डॉ झा एक विद्वान व्यक्ति हैं, जिनका भाजपा बड़ा मान सम्मान है, और वे राजद प्रत्याशी डॉ संजीव कुमार के पक्ष में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। इस अपमान ने ब्राह्मण समुदाय के मतदाताओं के मन में भी डॉ यादव के प्रति गुस्सा पैदा कर दिया है, जो भाजपा का एक मजबूत वोट बैंक है।
कुर्मी समाज की अनदेखी, नए समीकरणों को जन्म देना_
राजद से स्नातक क्षेत्र से कुर्मी समाज से आने वाले उम्मीदवार को टिकट मिलने से भी नया समीकरण बन रहा है। यदि डॉ यादव अपनी जाति-आधारित राजनीति में बदलाव नहीं लाते, तो उन्हें इस समुदाय के वोट मिलना मुश्किल हो सकता है, जो उनके चुनाव को और भी मुश्किल बना सकता है।
क्या सटाकर मारने से चुनाव जीता जा सकता है ?_
डॉ यादव के बयान ने सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या सटाकर मारने से चुनाव जीता जा सकता है? लोकतंत्र में चुनाव जनता के बीच रहकर, विकास कार्यों के आधार पर और उनकी भावनाओं का सम्मान करके जीता जाता है, न कि अहँकारपूर्ण बयानों से।
डॉ नवल प्रसाद यादव का अहँकारपूर्ण व्यवहार उनकी राजनीतिक यात्रा के लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है। उन्हें अपने विरोधियों और जनता का सम्मान करना चाहिए, और राजनीति में मर्यादा का पालन करना चाहिए। अन्यथा, उन्हें चुनाव में हार का मुंह देखना पड़ सकता है।
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