नए E100 वाहन नियम और इथेनॉल सम्मिश्रण: क्या हैं बदलाव और उपभोक्ताओं की चिंताएं?
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 में संशोधन किया है, जिससे 100% तक इथेनॉल (E100) युक्त ईंधन का उपयोग करने वाले वाहनों को अनुमति मिल गई है। यह कदम फ्लेक्स-फ्यूल (flex-fuel) वाहनों के लिए रास्ता साफ करता है, जो पेट्रोल या इथेनॉल के विभिन्न अनुपातों पर चल सकते हैं। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि मौजूदा वाहन मालिकों को E85 या E100 पर स्विच करने या अपने वाहनों को संशोधित करने की कोई आवश्यकता नहीं है, और वाहन चालकों को केवल अपने वाहन के फ्यूल-कम्पैटिबिलिटी स्टिकर या मैनुअल की जांच करनी चाहिए।
भारत ने 2030 के मूल लक्ष्य से पांच साल पहले 2025 में ही 20% इथेनॉल सम्मिश्रण (E20) का लक्ष्य हासिल कर लिया है। हालांकि, इन बदलावों के बीच उपभोक्ताओं और विशेषज्ञों के मन में कई चिंताएं हैं। वाहन मालिकों को इंजन की सुरक्षा, रखरखाव लागत, माइलेज में गिरावट (इथेनॉल का ऊर्जा घनत्व पेट्रोल से कम होता है) और मानसून के दौरान पानी से होने वाले संदूषण का डर सता रहा है। इसके अलावा, बड़े पैमाने पर इथेनॉल उत्पादन के लिए भूमि, पानी और खाद्य फसलों के उपयोग को लेकर भी बहस जारी है।
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