भारतीय कर नीति और वैश्विक पूंजी: एलटीसीजी (LTCG) और एसटीटी (STT) पर पुनर्विचार की आवश्यकता।


   

 वित्त मंत्री द्वारा लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन (LTCG) टैक्स और सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) पर बहस की शुरुआत करने का स्वागत किया गया है, हालांकि इसमें कोई तात्कालिक बदलाव की घोषणा नहीं की गई थी.  

​विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) की निकासी: इस वर्ष 12 अक्टूबर तक FPIs द्वारा भारतीय इक्विटी से लगभग 1.08 लाख करोड़ रुपये की निकासी की गई है. हालांकि कर इसके एकमात्र कारण नहीं हैं, बल्कि वैश्विक ब्याज दरें, प्रतिस्पर्धा और मुद्रा मूल्यह्रास भी इसमें शामिल हैं.  

​अंतरराष्ट्रीय तुलना: ताइवान, ब्राजील और वियतनाम जैसे देश विदेशी निवेशकों को कर मामलों में अधिक अनुकूल और स्पष्ट छूट या लाभ प्रदान करते हैं, जिससे भारत को अपनी नीतियों को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने की आवश्यकता महसूस होती है.  

​मुद्रा और कर संबंधी विसंगतियां: विदेशी मुद्रा गणना और विशेष FPI व्यवस्था में सूचकांक (indexation) का लाभ न मिलना निवेशकों के लिए चिंता का विषय है, जिसे दूर करने की आवश्यकता है.  

सरकार को केवल LTCG को समाप्त करने या रखने के विकल्प तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि कम कर दरों, लक्षित राहत, स्पष्ट नियमों और समयबद्ध विवाद समाधान पर ध्यान देना चाहिए ताकि भारत वैश्विक पूंजी के लिए एक अनुमानित और आकर्षक गंतव्य बन सके.  

​#TaxMatters #LTCG #STT #IndianEconomy #ForeignInvestment #Finance  #TaxPolicy

Comments

Popular posts from this blog

केवी स्कूल की छात्रा रास्ते से रहस्यमय परिस्थितियों में गायब, रेलवे ट्रैक के पास झाड़ियों में मिले कपड़े और बस्ता! -प्रो प्रसिद्ध कुमार।

रहना नहीं देश वीराना है: मिथिलेश सिंह को अश्रुपूरित श्रद्धांजलि और एक संकल्प की शुरुआत !

अलविदा! एक जन-नेता का सफर हुआ पूरा: प्रोफेसर वसीमुल हक़ 'मुन्ना नेता' नहीं रहे !