## विधान परिषद (MLC) चुनाव में वोटो की गणना कैसे होती है? जानिए प्रथम और द्वितीय वरीयता के वोटो का पूरा गणित।
भारत में विधान परिषद (MLC) के चुनाव आम चुनावों (जैसे लोकसभा या विधानसभा) से काफी अलग होते हैं। यहाँ मतदाता किसी एक उम्मीदवार को सीधे वोट देने के बजाय मैदान में उतरे सभी उम्मीदवारों को उनकी पसंद के अनुसार वरीयता (Preference) देते हैं। इस पूरी प्रक्रिया को 'एकल संक्रमणीय मत पद्धति' (Single Transferable Vote System - STV) कहा जाता है। आइए इसे विस्तार से समझते हैं कि प्रथम और द्वितीय वरीयता के वोटो की गणना किस प्रकार की जाती है।
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### 1. वरीयता क्रम (Preference Order) क्या है?
मतदान के दौरान मतदाता को मतपत्र पर उम्मीदवारों के नाम के आगे 1, 2, 3... लिखकर अपनी पसंद दर्ज करनी होती है:
* प्रथम वरीयता (1st Preference): मतदाता की सबसे पहली पसंद।
* द्वितीय वरीयता (2nd Preference): यदि पहली पसंद का उम्मीदवार न जीते, तो उसकी दूसरी पसंद।
* इसी प्रकार आगे की वरीयताएँ भी हो सकती हैं।
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### 2. जीत के लिए 'कोटा' (Quota) का निर्धारण
एमएलसी चुनाव में जीतने के लिए साधारण बहुमत की आवश्यकता नहीं होती, बल्कि निर्वाचन आयोग द्वारा निर्धारित एक निश्चित 'कोटा' पार करना होता है। कोटे का मानक फॉर्मूला निम्नलिखित है:
कोटा = (कुल वैध मतों की संख्या / रिक्त सीटों की संख्या + 1) + 1
यदि निर्वाचन क्षेत्र में केवल एक सीट खाली है, तो फॉर्मूला यह होगा:
कोटा = (कुल वैध मतों की संख्या / 2) + 1
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### 3. वोटो की गणना की चरण-दर-चरण प्रक्रिया
#### प्रथम चरण (First Round Count):
* सबसे पहले केवल प्रथम वरीयता (1st Preference) के वोटो की गिनती की जाती है।
* यदि पहले ही चरण में किसी उम्मीदवार को निर्धारित कोटा मिल जाता है, तो उसे तुरंत विजयी घोषित कर दिया जाता है।
#### द्वितीय चरण और वोटो का हस्तांतरण (Second Round & Transfer):
* यदि पहले चरण में किसी भी उम्मीदवार को कोटा प्राप्त नहीं होता है, तब द्वितीय वरीयता (2nd Preference) के वोटो की भूमिका शुरू होती है।
* सबसे कम वोट पाने वाले उम्मीदवार को रेस से बाहर (Eliminate) कर दिया जाता है।
* अब उस बाहर किए गए उम्मीदवार के मतपत्रों की जाँच की जाती है कि उनके मतदाताओं ने द्वितीय वरीयता (2nd) पर किसे वोट दिया है।
* उन मतो को संबंधित जीवित (रेस में बने) उम्मीदवारों के खातों में स्थानांतरित (Transfer) कर दिया जाता है। यह प्रक्रिया तब तक चलती है जब तक कोई उम्मीदवार कोटा प्राप्त न कर ले।
### 4. उदाहरण द्वारा समझें (Example)
मान लीजिए कि किसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में कुल 10,000 वैध वोट पड़े हैं और सीट 1 है।
* जीतने के लिए निर्धारित कोटा:
कोटा = (10,000 / 2) + 1 = 5,001 वोट
प्रथम चरण की गिनती:
मैदान में 3 उम्मीदवार हैं—क, ख और ग।
* उम्मीदवार 'क' को मिले प्रथम वरीयता के वोट = 4,000
* उम्मीदवार 'ख' को मिले प्रथम वरीयता के वोट = 3,500
* उम्मीदवार 'ग' को मिले प्रथम वरीयता के वोट = 2,500
> नतिजा: यहाँ किसी भी उम्मीदवार को 5,001 का कोटा नहीं मिला। सबसे कम वोट पाने वाले उम्मीदवार 'ग' (2,500 वोट) को बाहर कर दिया जाएगा।
द्वितीय चरण की गिनती (हस्तांतरण):
अब उम्मीदवार 'ग' के सभी 2,500 मतपत्रों की दोबारा जाँच की जाएगी कि उनके मतदाताओं ने द्वितीय वरीयता (2nd Preference) पर किसे चुना है:
* मान लीजिए इनमें से 1,500 वोटो पर द्वितीय वरीयता 'क' को दी गई थी।
* और 1,000 वोटो पर द्वितीय वरीयता 'ख' को दी गई थी।
अब इन वोटो को उम्मीदवारों के पुराने वोटो में जोड़ दिया जाएगा:
* 'क' के कुल वोट: 4,000 (प्रथम चरण) + 1,500 (हस्तांतरित) = 5,500 वोट
* 'ख' के कुल वोट: 3,500 (प्रथम चरण) + 1,000 (हस्तांतरित) = 4,500 वोट
> अंतिम परिणाम: उम्मीदवार 'क' ने 5,001 के कोटे को पार कर लिया है और कुल 5,500 वोट हासिल कर लिए हैं, इसलिए उम्मीदवार 'क' को विजयी घोषित कर दिया जाएगा।
विधान परिषद चुनाव की यह अनूठी प्रणाली यह सुनिश्चित करती है कि जनप्रतिनिधि को केवल एक सीमित वर्ग का नहीं, बल्कि व्यापक और अनुक्रमित समर्थन प्राप्त हो। यही कारण है कि इसमें हर एक वोट का महत्व और उसका सही उपयोग सुनिश्चित होता है।
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