निवेशकों के लिए पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सेवा (PMS) और PRIM का नया नियम: क्या यह वाकई फायदेमंद है?


   

सेबी (SEBI) द्वारा शुरू किए गए नए 'PRIM' (पोर्टफोलियो मैनेजर्स रूट) मार्ग ने निवेशकों के लिए नए विकल्प खोले हैं, लेकिन इसके शुल्क और जटिलता को लेकर कई सवाल भी खड़े होते हैं। 

​प्रवेश सीमा (Entry Limit): सेबी ने 2012 में पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सेवाओं (PMS) के लिए न्यूनतम टिकट साइज 25 लाख रुपये से बढ़ाकर 50 लाख रुपये किया था, जिसे अब नए PRIM मार्ग के जरिए म्यूचुअल फंड और अन्य उत्पादों में निवेश के लिए वापस 25 लाख रुपये कर दिया गया है।  

​नए विकल्प और लीवरेज: इस नए नियम के तहत प्रबंधक आईपीओ (IPOs), नए ऋण मुद्दों (debt issues) में भाग ले सकते हैं, असत्यापित बांड (unlisted bonds) में 10 प्रतिशत तक निवेश कर सकते हैं, और पहली बार 1.25x तक व्युत्पन्न एक्सपोजर (derivatives exposure) यानी लीवरेज की अनुमति दी गई है।  

​शुल्क का बोझ (Fee Stacks): इसमें प्रबंधन शुल्क 1% तक सीमित है, लेकिन प्रदर्शन शुल्क (performance fees), परिचालन लागत और फंड के अपने खर्चे जुड़ने पर यह सामान्य योजनाओं से काफी महंगा पड़ सकता है। ब्रिटेन और यूरोप की तरह भारत में भी इस बात की समीक्षा की जानी चाहिए कि क्या कम कीमत वाले उत्पादों के मुकाबले ये जटिल और महंगे उत्पाद निवेशकों के लिए मूल्यवान हैं या नहीं।  

​वैश्विक तुलना: भारत का मॉडल नाइटक्लब बाउंसर की तरह है जो केवल बटुए का आकार (धनराशि) देखता है, जबकि वैश्विक स्तर पर निवेशकों को जोखिम भरे उत्पादों के लिए उपयुक्तता परीक्षण से गुजरना पड़ता है।  

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