डिजिटल युग का नया जाल: डार्क पैटर्न और उपभोक्ताओं का शोषण।
डिजिटल दुनिया और ऑनलाइन सेवाओं ने हमारे जीवन को जितना आसान बनाया है, उतना ही हमारे सामने नए तरह के धोखे भी खड़े कर दिए हैं। हाल ही में सेंट्रल कंज्यूमर प्रोटेक्शन अथॉरिटी (CCPA) द्वारा एक राइड एग्रीगेटर पर ₹10 लाख का जुर्माना लगाया जाना इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि ऑनलाइन व्यवसायों में किस प्रकार ग्राहकों को गुमराह किया जा रहा है। डार्क पैटर्न क्या हैं और यह कैसे काम करते हैं? बास्केट स्नेकिंग: ट्रेन टिकट बुक करते समय बिना इच्छा के भोजन को साथ में जोड़ देना, जिसका भुगतान ग्राहक अनजाने में कर बैठते हैं। मनोवैज्ञानिक प्रलोभन: "जितनी अधिक कीमत, राइड मिलने की उतनी अधिक संभावना" जैसे प्रॉम्प्ट्स का उपयोग करके उपयोगकर्ताओं से अधिक किराया वसूला जाना। बैटरी और ओएस आधारित भेदभाव: कुछ राइड एग्रीगेटरों पर यह आरोप भी है कि वे उन उपयोगकर्ताओं से अधिक किराया वसूलते हैं जिनके फोन की बैटरी कम होती है या जो प्रीमियम ऑपरेटिंग सिस्टम का उपयोग करते हैं। डार्क पैटर्न केवल एक मनोवैज्ञानिक चाल नहीं है, बल्कि यह उपभोक्ताओं की जेब पर सीधा डाका डाल रहा है। Datum इंटेलिजेंस की एक रिपोर्ट के अनुसार, ...